सरकार से न्याय की गुहार लगाई, भूतपूर्व बना दिए गए सुभाष घाटे

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नागपुर में मुख्यमंत्री निवास 'रामगिरि' के आगे पिछले दिनों आत्मदाह का प्रयास करने वाले मनपा के पूर्व कर्मी को रोकते पुलिसकर्मी (फाइल फोटो) और भाजपा के ओबीसी नेता सुभाष घाटे.

नागपुर मनपा के 17 पूर्व कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति के लिए संघर्ष का मामला

नागपुर : ‘अपनी ही सरकार से न्याय की गुहार लगाई, भूतपूर्व बना दिए गए.’ सुभाष घाटे कल तक भारतीय जनता पार्टी की ओबीसी इकाई के नागपुर विभाग के अध्यक्ष थे. बताया जा रहा है कि आज शुक्रवार को इकाई के प्रदेश अध्यक्ष विजय चौधरी ने उन्हें पद मुक्त कर दिया है.

सुभाष घाटे ओबीसी समाज के मनपा के 17 पूर्व कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति के लिए संघर्ष कर रहे थे. समझा जाता है कि घाटे को इसी की सजा मिली है. पिछले 11 फ़रवरी को नागपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास के सामने आत्महत्या का प्रयास करने के जुर्म में उन्हें गिरफ़्तार भी किया गया था. लेकिन घाटे का कहना है कि वह मुख्यमंत्री निवास के सामने पहुंचे अन्य निष्काषित कर्मचारियों को आत्महत्या का प्रयास करने से रोकने के लिए गए हुए थे.

अदालत के आदेश के बावजूद वर्षो से मनपा में विभिन्न विभागों में कार्यरत रहे 17 कर्मचारी अपनी नियुक्ति नहीं मिल पाने को लेकर संघर्षरत हैं. 1993 में 256 भर्तियां की गई थी. इनमें से 106 कर्मचारियों को अतिरिक्त बता कर नौकरी से निकाल दिया गया था. 1997 में इन कर्मचारियों की वापस भर्ती का आदेश दिया गया था. इसके बाद 106 में से 89 लोगों को काम पर वापस ले लिया गया, लेकिन बचे 17 लोग अब भी न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

सुभाष घाटे का कहना है कि वे शुरू से ही इन निष्काषित कर्मचारियों की लड़ाई लड़ रहे हैं. उनकी इस लड़ाई की वजह से पिछले चुनावों में भाजपा को फ़ायदा भी हुआ है. लेकिन अब अचानक अब पार्टी की ओर से उनके विरुद्ध ऐसे कदम उठाना आश्चर्यजनक है. उन्होंने कहा की न्याय की यह लड़ाई वे हर हाल में जारी रखेंगे.

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