चारा घोटाला : लालू प्रसाद यादव को 3.5 साल की सजा, 5 लाख का जुर्माना

मामला देवघर कोषागार से अवैध रूप से 84.54 लाख निकालने व साजिश रचने वालों को बचाने की कोशिश करने की

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रांची : सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले के एक मामले में साढ़े तीन साल की सजा सुनाई है. उन्हें यह सजा वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनाई गई है. साढ़े तीन साल की सजा के अलावा लालू प्रसाद पर पांच लाख रुपए का ज़ुर्माना भी लगाया गया है. लालू फिलहाल रांची की बिरसा मुंडा जेल में हैं.

जगदीश शर्मा को 7 साल की सजा और 20 लाख रुपए जुर्माना

देवघर कोषागार के इस मामले में लालू को 23 दिसंबर 2017 को दोषी ठहराया गया था. लालू के अलावा और 15 लोग दोषी करार दिए गए थे, जिनमें छह दोषियों को सात-सात साल की सजा सुनाई गई है. सीबीआइ के विशेष कोर्ट में जज शिवपाल सिंह ने यह फैसला सुनाया

– लालू यादव के अलावा पीएसी (लोक लेखा समिति) के पूर्व अध्यक्ष जगदीश शर्मा को इसी मामले में सात साल की सजा और बीस लाख रुपए जुर्माना लगाया गया है.

– आरके राणा को 3.5 वर्ष की सजा और 10 लाख जुर्माना, महेंद्र, राजाराम, सुनील कुमार सिन्हा, सुशील कुमार, फूलचंद, महेश और बेक जूलियस को भी 3.5 वर्ष की सजा और पांच-पांच लाख का जुर्माना लगाया गया है.

– जबकि सुनील गांधी, त्रिपुरारी मोहन प्रसाद, संजय अग्रवाल, गोपीनाथ दास को 7 साल की सजा और 10-10 लाख रुपए जुर्माना लगाया गया है. चारा घोटाले के सभी दोषियों को सजा 4 बजकर 20 मिनट पर सुनाई गई.

इसी कोर्ट से नहीं मिलेगी जमानत

ये सजा तीन साल से ज़्यादा की है, लिहाजा इन्हें इसी अदालत से जमानत नहीं मिलेगी. लालू प्रसाद की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभात कुमार ने बताया कि अब वे लोग उच्च न्यायालय में अपील करेंगे.

यह मामला 1991 से 94 के बीच का है. इस दौरान देवघर कोषागार से अवैध तरीके से 84.54 लाख रुपए निकाले गए थे. मामले में कुल 22 अभियुक्त थे, जिनमें से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर जगन्नाथ मिश्र समेत छह लोग बरी कर दिए गए थे.

क्या था मामला?

इस मामले में लालू यादव पर इल्ज़ाम है कि उन्होंने साज़िश रचने वालों को बचाने की कोशिश की. सीबीआई के मुताबिक उस वक़्त राज्य के मुख्यमंत्री रहे लालू ने जांच की फाइलें अपने कब्जे में रखी थीं.

इसके अलावा नौकरशाहों की आपत्ति के बावजूद लालू प्रसाद ने तीन अधिकारियों को एक्सटेंशन दिया था. सीबीआई का कहना था कि लालू यादव को गबन के बारे में पता था फिर भी उन्होंने इस लूट को नहीं रोका. शुरू में इस केस में 34 लोगों पर आरोप तय किए गए थे, लेकिन इनमें से 11 लोगों की मामले की सुनवाई के दौरान मौत हो गई.

लालू पर चल रहे हैं तीन और मामले

लालू यादव चारा घोटाले के तीन और मामलों में अभियुक्त हैं. जिनकी सुनवाई रांची में सीबीआई की अलग-अलग अदालतों में चल रही है. इनमें से एक और मामले में जल्द ही फैसला आ सकता है.

गौरतलब है कि नवंबर 2014 में झारखंड हाई कोर्ट ने लालू प्रसाद को राहत देते हुए कहा था कि एक मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति के खिलाफ उन धाराओं से मिलते-जुलते अन्य मामलों में सुनवाई नहीं हो सकती. इस फैसले के खिलाफ सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसे कोर्ट ने मंज़ूर किया और मई 2017 में लालू के खिलाफ चारा घोटाले के अलग-अलग मामलों में मुकदमा चलाने का आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि हर मामले की अलग सुनवाई होनी चाहिए. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को इन मामलों में नौ महीने में सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया था.

चारा घोटाले में कई बार जेल जा चुके हैं लालू

900 करोड़ के गबन वाले चारा घोटाले में एक मामला चाईबासा कोषागार का है. चाईबासा तब अविभाजित बिहार का हिस्सा था. वहां के कोषागार से कथित तौर पर 37.7 करोड़ रुपए अवैध तरीके से निकाले गए थे. इस मामले में तीन अक्तूबर 2013 को रांची की एक सीबीआई अदालत ने लालू यादव को पांच साल की सजा सुनाई थी. साथ ही अदालत ने उन्हें 25 लाख का जुर्माना भी अदा करने को कहा था. दो महीने जेल में रहने के बाद लालू को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई, लेकिन सजायाफ़्ता होने की वजह से वे संसद की सदस्यता गंवा बैठे और चुनाव लड़ने के लिए भी अयोग्य हो गए.

2013 में जब लालू जेल गए थे, उस समय झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के साथ उनकी पार्टी सरकार में थी, अब झारखंड में भाजपा की सरकार है.

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