धार्मिक नफरत और हिंसा के लिए ‘तब्लीगी जमात’ निशाने पर

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धार्मिक

*कल्याण कुमार सिन्हा-
सामयिकी : इस्लामिक मुल्कों में विचारों और रहन-सहन में तेजी से बदलाव देखे जा रहे हैं. धार्मिक कट्टरता को लेकर भी बदलाव आता दिखाई देने लगा है. प्रमुख मुस्लिम राष्ट्र सऊदी अरब के साथ अफगानिस्तान, पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे मुस्लिम देशों में भी ऐसे बदलाव नजर आ रहे हैं.

धार्मिक कट्टरता से पैदा हो रही नफरत और दहशतगर्दी को लेकर दुनिया के मुस्लिम समुदाय के विवेकशील और विचारशील लोगों में अधिक बेचैनी है. इससे अन्य धार्मिक समुदायों और राष्ट्रीयताओं में मुस्लिम समुदाय के दुराव उन्हें ज्यादा ही उद्वेलित कर रहा है. इसको लेकर सऊदी अरब ने अप्रत्याशित कदम उठाया है. उसने इस्लाम के प्रति सुन्नी समुदाय में जागरूकता फैलाने के नाम पर तब्लीगी जमात के कार्यों को जिम्मेदार ठहरा दिया है. साथ ही सऊदी इस्लामिक मामलों के मंत्रालय ने मस्जिद के मौलवियों को आदेश दिया है कि वे लोगों को तब्लीगी जमात के बारे में आगाह करें.

दुनिया के इस्लामिक मुल्कों का सिरमौर कहे जाने वाले सऊदी अरब ने तब्लीगी जमात को प्रतिबंधित करने की घोषणा कर दुनिया भर के मुस्लिमों को चौंका दिया है. हालांकि कभी यह जमात सऊदी अरब की आंखों का तारा हुआ करता था. वैसे तब्लीगी जमात की गतिविधियों पर तीस साल से ज्यादा समय से उसने रुचि दिखाना काम कर दिया था. लेकिन अब आतंकवाद से पहली बार जोड़ते हुए उसको, उसने आतंकवाद का प्रवेश द्वार ही करार देकर प्रतिबंधित कर दिया है.

नार्थ अफ्रीकी धार्मिक समूह ‘अल अहबाब’ के कथित दहशतगर्द वाकयों का हवाला देते हुए जमात को सुन्नी कट्टरपंथ को दुनिया भर में बढ़ावा देने का आरोप लगाकर उसे इस्लाम के सबसे बड़े केंद्र सऊदी अरब द्वारा प्रतिबंधित किया जाना, बहुत बड़ी घटना है. सऊदी अरब के धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने हाल ही में ऐसा बयान जारी किया है. हालांकि, एक समय था, जब इसे अपने पंख पसारने में सऊदी अरब ने ही मदद की थी और प्रोत्साहन के साथ धन भी मुहैया कराता रहा था. बताया जाता है कि तब्लीगी जमात सऊदी जमात सहित दुनिया के 150 मुल्कों में सक्रिय है.

अब आरोप है कि सुन्नी समुदाय को जमात इस्लाम में निहित कायदे-कानूनों को बिना अपनी अक्ल लगाए कट्टरता के साथ पालन करने पर जोर देता है. माना जाता है कि अपने अनुयायियों से ऐसी अपेक्षा करने वाले इस संगठन के कारण दुनिया भर में मजहब की अन्य धाराएं, जैसे- शिया, अहमदिया, हाजरा मुसलमानों के विरुद्ध नफरत और हिंसा बढ़ी है.

उम्मीद की जा रही है कि जमात की धार्मिक कट्टरता के विरुद्ध अन्य देश भी जल्द ही ऐसे कदम उठा सकते हैं. तब्लीगी जमात की स्थापना भारत में 1926 को हुई थी. इसे एक रूढ़िवादी मुस्लिम धार्मिक संगठन माना जाता है. यह संगठन मुस्लिमों से हालांकि धर्म के अनुरूप कट्टरता के साथ अपना जीवन यापन करने पर जोर देता है, लेकिन इस कट्टरता के माध्यम से फैल रही नफरत और हिंसा से बेजार दुनिया भर के सुन्नियों में भी बेचैनी बढ़ी है. अब, सऊदी अरब के ऐसे ऐलान के बाद तो समझा जाता है कि संगठन की गतिविधियों पर असर पड़ेगा. अन्य इस्लामिक देश भी कदम उठा सकते हैं. 

जमात की बुनियाद वाले भारत में भी इस संगठन की पैठ बहुत मजबूत बताई जाती है. यही कारण है कि भारत के मुस्लिम संगठनों ने तब्लीगी जमात पर प्रतिबंध लगाने के सऊदी अरब के फैसले की कड़ी आलोचना की है. यहां तक कि सऊदी अरब के इस फैसले पर भारत में दारूल उलूम, देवबंद ने गत रविवार को एक बयान जारी कर कहा है कि संगठन के धार्मिक क्रियाकलापों को आतंकवाद के साथ जोड़ना बेबुनियाद है.

देवबंद ने सऊदी अरब को अपने प्रतिबंध के फैसले की समीक्षा करने के लिए कहा है. जमात ए इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सदातुल्लाह हुसैनी ने कहा कि सऊदी अरब का यह फैसला इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है. उन्होंने कहा, ‘यह अन्यायपूर्ण है…ऐसा वे पहले भी कर चुके हैं. वे सुधारवादी आंदोलन के साहित्य पर प्रतिबंध लगा चुके हैं.’ इसी प्रकार भारत के अन्य मुस्लिम संगठनों ने भी सऊदी अरब के इस कदम को ‘अन्यायपूर्ण’ और इस्लाम के सिद्धांतों का उल्लंघन करने वाला बताया है.

ब्रिटेन से एक वीडियो संदेश में, हजरत निजामुद्दीन मरकज के तबलीगी जमात के प्रवक्ता समीरुद्दीन कासमी ने कहा, “यह तबलीगी जमात पर एक बड़ा आरोप है. इसका आतंकवाद से कोई संबंध नहीं है. तब्लीगी जमात वह समूह है, जो आतंकवाद को रोकता है, आतंकवाद की निंदा करता है और आतंकवाद को खारिज करता है.”

तब्लीगी जमात के एक धड़े के सदस्य मोहम्मद मियां ने कहा, ‘हमारे जमात के लोग पूरी दुनिया में काम कर रहे हैं. सऊदी अरब में भी जमात के सदस्य मुसलमानों को सही रास्ते पर लाने के लिए काम कर रहे हैं जैसा कि पैगंबर ने सिखाया था. हम सऊदी सरकार के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन हमारे जमात सऊदी अरब में काम करना जारी रखेंगे.

दरअसल, जमात से जुड़े सदस्यों का अंतिम विदेशी जत्था एक सप्ताह पहले भारत से रवाना हुआ है. जमात के विदेशी सदस्य करीब 21 महीने तक भारत में रहे. कोरोना महामारी की शुरुआत में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का उल्लंघन करने पर इस धार्मिक संगठन से जुड़े कई लोगों के खिलाफ भारत में केस दर्ज हुआ था.

भारतीय जेल में बंद थे जमात के सदस्य
जमात के करीब 600 सदस्यों में शामिल थाईलैंड के नौ नागरिक जेल में बंद थे. गत शुक्रवार को उनकी जेल की सजा पूरी हुई. इसके बाद वे हापुड़ से स्वदेश रवाना हुए. सऊदी अरब के इस्लामी मामलों के मंत्रालय ने मौलवियों से कहा है कि वे शुक्रवार को जुमे के नमाज के दिन अपनी मस्जिदों से समूह के ‘खतरे’ के बारे में लोगों को आगाह करें. हालांकि, कई मुस्लिम संगठनों का कहना है कि सऊदी अरब का ट्वीट नार्थ अफ्रीकी धार्मिक समूह ‘अल अहबाब’ के लिए था, लेकिन यह बात तब्लीगी पर भी लागू होती है. अब सऊदी अरब ने अपने यहां इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया है. सऊदी ने तबलीगी जमात को ‘आतंकवाद का एंट्री गेट’ तक बताया है.

इस जमात का इतिहास हैरान कर देने वाले किस्सों से भरा पड़ा है. कोरोना बीमारी को मोदी रचित षड्यंत्र बताने वाली इस जमात ने भारत में काम उत्पात नहीं मचाया था, उनको तो यहां देश की ‘धर्मनिरपेक्ष’ ताकतों का सहारा भी मिल गया था.  

भारत की बात तो दीगर, इस बात की भी चर्चा रही कि पाकिस्तान को भी जमात नाक में दम करने से बाज नहीं आया. वहां तो हालात यह हो चले थे कि लॉकडाउन को असफल करने के उद्देश्य से तैयार कोरोना की मजाक उड़ाते दिखाने वाले वीडियो की सोशल मीडिया में जैसे बाढ़ ही आ गई थी. वायरस की जगह औरतों के घटते कपड़े और बढ़ती ‘बेहयाई’, झूठ, धोखेबाजी और बेइमानी को बीमारी के फैलने का कारण बताने वाले एक मौलाना साहब ने इस बीच अपने विडियो से काफी शोहरत हासिल कर ली थी. बताते हैं कि आगे चलकर कोरोना जब उनके पीछे भी पड़ गया तो इसी आधुनिक चिकित्सा से ही उन्हें कोरोना से अपनी जान बचानी पड़ी.

उस दौरान इमरान खान की सरकार के एक कैबिनेट मंत्री ने ट्वीट करके ये सनसनी फैला दी थी कि देश में तबलीगी जमातियों ने ही कोरोना फैलाया है. फैसलाबाद के तबलीगी जमात के मुखिया की जब कोरोना से मौत हुई तो सरकार चौकन्नी हो उठी. बाकि तबलीगियों की धरपकड़ के लिए सरकार को आईएसआई का सहारा लेना पड़ा था.

तब्लीगियों के ऐसे विचारों के प्रचार-प्रसार की दुनिया का ध्यान तब गया, जब दुनिया भर में शिया, अहमदिया, हाजरा आदि मुसलमानों पर नफरत और हिंसा को जायज ठहराने का चलन शुरू हो गया. ऐसे हालात पैदा होने पर मुस्लिम देशों की आंखें खुलनी शुरू हुईं और समझदार बिरादरी को लगने लगा कि अब वक्त आ गया है कि इंसानियत को ही तार-तार कर देने वाले ऐसे जुनून के खिलाफ कदम उठाए जाएं.

बताया जाता है कि इस संगठन के दुनिया भर में करीब 40 करोड़ सदस्य हैं. ये विशेष रूप से अपनी गतिविधियां मस्जिदों के आस-पास की सूनी आबादी वाले क्षेत्रों में करते हैं. इसके सदस्य इस्लामिक धार्मिक गतिविधियों का प्रचार करने के नाम पर दुनिया भर में यात्राएं करते हैं. बाहरी देशों से आने वाले इन प्रचारकों की बातों का सामान्य कम पढ़े-लिखे सुन्नियों पर असर भी गहरा पड़ता है. फिर उनमें गैर सुन्नी मुस्लिमों और अन्य समुदायों के लोगों के खिलाफ नफरत घर कर जाता है. इसका परिणाम गैर सुन्नी मुस्लिमों और अन्य समुदाय के लोगों को कभी ईश निंदा, तो कभी उनके मजहबी तौर-तरीकों के विरुद्ध हिंसक बनाता देखा जाता है. पाकिस्तान में ऐसी प्रवृत्ति तेजी से पनपी है. भारत भी इससे अछूता नहीं है. सऊदी अरब जैसे मुस्लिम देश के इस जमात के विरुद्ध सामने आने से तय माना जा रहा है कि दुनिया भर में इसके तौर-तरीकों पर अंकुश लगेगा.

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