कर्मचारी वेतन और पेंशन के हकदार हैं : सुप्रीम कोर्ट

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6% साधारण ब्याज दर से 30 दिनों में वेतन और पेंशन का भुगतान करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट का का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब EPS 95 पेंशनर्स सरकार और EPFO द्वारा शीर्ष अदालत में अपने विरुद्ध बिछाए गए जाल से निकलने और न्याय पाने की आश लगाए बैठे हैं. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला पेंशनरों की न्याय की आशा पर छाई काली घटाओं के बीच चमक वाली बिजली की तरह नई नई आशा जगाने वाली है. अर्थात यह तमाम negetivity के बीच posetivity की एक किरण सी है. ज्ञातव्य है कि सरकार और EPFO ने पेंशनरों के न्यायपूर्ण अधिक पेंशन पाने के अधिकार को दफ़न करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर उसे पुनर्विचाए याचिका और एसएलपी (SLP) दायर कर रखी है. अब इससे सम्बद्ध अन्य 60 मामले भी सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत में सूचीबद्ध हो चुके हैं. सुनवाई इसी मार्च महीने की 23 तारीख से दैनिक आधार पर करने का फैसला विद्वान न्यायाधीशों ने किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर माना है कि सरकारी कर्मचारी वेतन और पेंशन के न्यायपूर्ण पात्र (rightful entitlements) हैं, हकदार हैं. इसके साथ ही उसने कहा है कि सरकार ने यदि वेतन और पेंशन के भुगतान में देरी की है तो उसे उचित दर पर (अर्थात 12% की जगह 6% के साधारण ब्याज) ब्याज के साथ 30 दिनों के भीतर भुगतान करने के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए.

यह मामला आंध्र प्रदेश सरकार और उनके कर्मचारियों एवं पेंशनरों का है. उन्हें कोरोना महामारी के दौरान मार्च 2020 के वेतन और पेंशन का भुगतान राज्य सरकार ने नहीं किया था. निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य को वेतन और पेंशन का भुगतान 12% वार्षिक ब्याज के साथ करने का आदेश दिया था.

वेतन के साथ ब्याज के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में राज्य शासन की अपील पर बड़ी अदालत ने 12% ब्याज को अधिक बताया. लेकिन 6% के वार्षिक साधारण ब्याज के साथ वेतन और पेंशन के भुगतान 30 दिनों में करने का आदेश दिया. और इसी दौरान शीर्ष अदालत ने एक बार फिर यह व्यवस्था दी है कि वेतन और पेंशन कर्मचारी और पेंशनरों के न्यायपूर्ण अधिकार हैं.

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह की पीठ ने दोनों पक्षों द्वारा उठाए गए विवादों पर ध्यान दिया.

    विद्वान न्यायाधीशों ने कहा- “वेतन और पेंशन के विलम्बित भागों के भुगतान के लिए दिशा अपरिहार्य है. वेतन राज्य को प्रदान की गई सेवाओं के लिए कर्मचारियों को दिए जाते हैं. दूसरे शब्दों में कर्मचारी वेतन के वास्तविक हकदार हैं और कानून के अनुसार यह देय हैं. इसी तरह, यह अच्छी तरह से तय है कि पेंशन का भुगतान पेंशनभोगियों द्वारा राज्य को प्रदान की गई पिछली सेवा के वर्षों के लिए है. इसलिए पेंशन लागू नियमों और विनियमों द्वारा मान्यता प्राप्त एक सही हकदारी का मामला है जो राज्य अपने कर्मचारियों की सेवा को नियंत्रित करता है.”

मामला: आंध्र प्रदेश राज्य बनाम दीनवाही लक्ष्मी कामेश्वरी [सिविल अपील 2021 की संख्या 3 99]
कोरम: जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और एम.आर. शाह
COUNSEL: सीनियर एडवोकेट शेखर नफाड़े, एडवोकेट महफूज अहसन नाजक, एडवोकेट येलमानचिली शिवा संतोष कुमार
सीटेशन: एलएल 2021 एससी 113

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