PACS ने शुरू कर दी बिहार में धान की खरीदी

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पंजाब के किसान दिल्ली में कर रहे आंदोलन, बिहार के किसान काटने लगे हैं चांदी

 
*सीमा सिन्हा,   
पटना (बिहार) :
पंजाब और उत्तर प्रदेश के किसान जहां दिल्ली में प्रदर्शन और आंदोलन में जुटे हैं, वहीं बिहार में PACS (Primary Agriculture Credit Societies, प्राथमिक कृषि ऋण सोसाइटी) के माध्यम से किसान धान बेचने भी लगे हैं. उनकी मानों  लॉटरी लग गई है. चार जिलों में खरीदी शुरू भी हो गई है. 

न्यूनतम मूल्य 1,868 रुपए प्रति क्विंटल
यहां विधानसभा चुनाव बाद अब धान खरीद शुरू हो गई है. राज्य सहकारिता विभाग ने धान खरीद के लिए 4 हजार एजेंसियों- PACS को चुना है. वहीं धान बेचने के लिए अब तक 72 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है. इसके साथ ही चार जिलों में किसानों से खरीद शुरू भी हो गई है. धान का न्यूनतम मूल्य 1,868 रुपए प्रति क्विंटल तय है, जो पिछले वर्ष से 53 रुपए अधिक है. इसके लिए सरकार ने सभी PACS को पैसा दे दिया और किसानों का पंजीयन भी तेजी से हो रहा है.

30 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य
नीतीश सरकार ने 30 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य तय किया है. इतनी खरीद होती है तो किसानों को करीब 55 सौ करोड़ रुपए मिलेंगे. इधर बिहार सरकार ने इसके लिए 40 फीसदी रकम के लिए मंजूरी भी दे दी है. हालांकि सभी PACS को अभी लगभग 1,120 करोड़ यानी 20 प्रतिशत का ही कैश क्रेडिट (सीसी) लिमिट दी गई है. पूरे पैसे का लिमिट इसलिए अभी नहीं दिया गया है कि उन्हें अधिक ब्याज नहीं देना पड़े. जैसे-जैसे ये एजेंसियां धान खरीद पर खर्च करेंगी, वैसे-वैसे लिमिट भी बढ़ती जाएगी.

सहकारिता विभाग में धान बेचने के लिए अब तक 72 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है. धान की कटनी के साथ ही किसानों के रजिस्ट्रेशन का काम भी तेज हो गया है. पिछले साल इस समय तक 20 हजार 226 किसानों ने ही पंजीयन कराया था. हालांकि इस वर्ष विभाग ने पंजीयन की प्रक्रिया भी पहले शुरू कर दी थी. इसका फायदा किसानों को मिला है.

4 हजार एजेंसियों को काम पर लगाया गया
धान खरीद के लिए हर जिले में PACS का चयन किया गया है. सभी जिलों में लगभग चार हजार समितियों का चयन हो चुका है. इन समितियों में लगभग 2500 की मैपिंग भी पोर्टल पर कर दी गई है. जिन समितियों की मैपिंग हो गई है, वह धान खरीद के लिए स्वतंत्र हो गई हैं.

चार जिलों में धान खरीद शुरू
चार जिले के किसानों ने धान बेचने की शुरुआत कर दी है. भोजपुर, बक्सर, नालंदा और मुंगेर जिलों में लगभग 18 किसानों ने धान बेचा है. इन किसानों से अब तक 107 टन धान की खरीद हुई है. दूसरे अन्य जिले के जिन किसानों का धान तैयार है जिनसे एजेंसियां खरीद की तैयारी कर रही हैं.

धान में ज्यादा नमी है किसानों की समस्या
किसानों की बड़ी समस्या धान में नमी का अधिक होना है. जिन किसानों ने धान सुखा लिखा है, उन्हें तो कोई परेशानी नहीं हो रही है. लेकिन ऐसे किसानों की संख्या बहुत कम है. उनके पास सुखाने के लिए जगह नहीं है. सरकार 17 प्रतिशत तक नमी वाला धान ही खरीदती है, जबकि अभी धान में 20 से 22 प्रतिशत तक नमी है.

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