चीफ जस्टिस गोगोई को क्लीन चिट, यौन उत्पीड़न के आरोप खारिज

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गोगोई

नई दिल्ली : जस्टिस बोबड़े की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय पीठ ने सोमवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज किया है. सुप्रीम कोर्ट की पूर्व महिला कर्मचारी ने सीजेआई के खिलाफ 19 अप्रैल को लगाए आरोपों में कहा था कि सीजेआई ने पहले उनका यौन उत्पीड़न किया, फिर उन्हें नौकरी से बर्खास्त करवा दिया.

इन आरोपों की जांच के लिए जस्टिस एस.ए. बोबड़े की अगुवाई में आतंरिक जांच कमेटी का गठन किया गया. जस्टिस बोबड़े ने इस कमेटी में जस्टिस एन.वी. रमन और जस्टिस इंदिरा बनर्जी को शामिल किया था.

आतंरिक जांच कमेटी ने शिकायताकर्ता महिला को नोटिस जारी किया था. इससे बाद महिला ने इस कमेटी को एक लेटर लिखा था. इस लेटर में महिला ने कहा था, “बिना किसी वजह के और मेरी बात सुने बिना ही मेरे चरित्र को नुकसान पहुंचाया गया. कहा गया कि मेरे खिलाफ आपराधिक मामले हैं. ऐसी खबरें पढ़ने के बाद मैं भयभीत हो गई हूं और असहाय महसूस कर रही हूं.”

न्यायमूर्ति बोबड़े को भेजे पत्र में शिकायतकर्ता महिला ने इन आरोपों के बारे में उससे पूछताछ के लिए समिति में शीर्ष अदालत की एक ही महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी के शामिल होने पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह विशाखा प्रकरण के दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं है. महिला का कहना है कि विशाखा प्रकरण में शीर्ष अदालत के फैसले में प्रतिपादित दिशा निर्देशों के अनुासार कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए गठित समिति में महिलाओं का बहुमत होना चाहिए.

एक अधिकारी के अनुसार इस शिकायतकर्ता ने समिति के समक्ष पेश होते वक्त अपने साथ एक वकील लाने और समिति की कार्यवाही की वीडियो रिकार्डिंग का अनुरोध किया है, ताकि जांच में जो कुछ भी हुआ उसके बारे में किसी प्रकार का विवाद नहीं हो. अधिकारी ने बताया कि इस पत्र में महिला ने प्रधान न्यायाधीश द्वारा शनिवार को दिए गए बयानों पर भी चिंता व्यक्त की है, जब वह न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना के साथ बैठे थे.

शिकायतकर्ता महिला ने की थी निष्पक्ष जांच की मांग
अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मचारी ने कमेटी से कहा कि ‘मैं सिर्फ यह कह रही हूं कि सुनवाई के दौरान आप मेरे डर और आशंकाओं को ध्यान में रखें. मैंने काफी कुछ झेला है. मुझे पता है कि मेरे पास कोई पद या स्टेटस नहीं है. आपके सामने रखने के लिए मेरे पास सिर्फ सच है, मुझे न्याय तभी मिलेगा, जब मेरे मामले की निष्पक्ष सुनवाई होगी. महिला ने कहा है कि इस मामले की जांच विशाखा गाइडलाइन्स के साथ की जानी चाहिए. महिला ने अपने लेटर में वित्त मंत्री अरुण जेटली की टिप्पणी पर भी चिंता जताई. उन्होंने लिखा कि एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री के ब्लॉग में भी मेरी आलोचना की गई, इन घटनाओं से मैं काफी डरी हुई हूं और तनाव महसूस कर रही हूं.’

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