शुक्रवार : येदियुरप्पा के लिए अग्निपरीक्षा का दिन, राज्यपाल के लिए “राज-धर्मसंकट” का

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कौन सा लिस्ट भाजपा का होगा, कौन सा कांग्रेस-जेडी(एस) का : सूली पर लटकने को है “विवेक”

कल्याण कुमार सिन्हा
विश्लेषण :
भाजपा के बी.एस. येदियुरप्पा कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद पर काबिज तो हो गए हैं, और कांग्रेस उन्हें रोक पाने में सफल भले ही नहीं हो पाई, लेकिन एक बात तो हुई, जो येदियुरप्पा के लिए बड़ी भारी मुश्किल खड़ी कर गया है. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से राज्यपाल को दी गई अपने-अपने समर्थकों की सूची मांग ली है, और इसकी अगली सुनवाई की तिथि शुक्रवार, 18 मई तय कर दिया है. इस कारण बहुमत सिद्ध करने के लिए राज्यपाल से मिला 15 दिनों का समय अब घट कर मात्र 24 घंटे रह गए हैं.

तो “विवेक” पर भी उठ खड़े होंगे सवाल
इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट के सामने यदि येदियुरप्पा इन 24 घंटों में यह बता नहीं पाए कि उन्हें 112 निर्वाचित विधायकों का समर्थन प्राप्त है, तो राज्यपाल के “विवेक” पर भी सवाल उठ खड़े होंगे. जानकारों के मुताबिक कल का दिन येदियुरप्पा के लिए यदि अग्निपरीक्षा का दिन है तो राज्यपाल वजुभाई वाला के लिए भी “राज-धर्मसंकट” का दिन है. येदियुरप्पा विफल रहे तो फिर देश के इतिहास में एक नया संवैधानिक प्रश्न उठ खड़ा होने की संभावना है. “राज-धर्म” की बात भले ही कोई संवैधानिक मसला न हो, लेकिन यह संवैधानिक सुचिता से जुड़ा पहलू तो है ही.

संवैधानिक प्रावधानों की दुविधा और “विवेक” का द्वंद्व
इस लिहाज से कर्नाटक में सत्ता की जंग का पटाक्षेप अभी नहीं हुआ है. इसका अंत कैसा और कब होगा, यह अब शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ही पता चल पाएगा. सत्ता प्रदान करने का आधार बहुमत हो अथवा सबसे बड़े दल को सत्ता सौंपी जाए, इस पर भी संवैधानिक प्रावधानों की दुविधा और “विवेक” का द्वंद्व खत्म होने का मार्ग बन सकता है.

देर रात सुप्रीम कोर्ट ने की सुनवाई
कर्नाटक के मसले को लेकर कांग्रेस की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ए.के. सीकरी, अशोक भूषण और एस.ए. बोबड़े की खंडपीठ ने आधी रात के बाद पौने दो बजे कांग्रेस-जेडी(एस) की याचिका पर सुनवाई शुरू की और सुबह पांच बजे य‍ह फैसला सुना दिया कि व‍ह राज्‍यपाल के संवैधानिक अधिकारों में दखल नहीं दे सकती. इसलिए येदियुरप्‍पा के लिए पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक आज ही शपथ लेने का मार्ग प्रशस्त हो गया. याचिकाकर्ता कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी ने अर्जी दी थी कि शाम तक इस शपथ ग्रहण समारोह को टाल दिया जाए, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया.

बहुमत साबित करना होगा चुनौती
लेकिन देर रात की सुनवाई के बाद खंडपीठ ने एक अहम बात कही कि शुक्रवार (18 मई) को अदालत इस मामले में पर दोबारा सुनवाई करेगी और दोनों ही पक्षों के समर्थन करने वाले विधायकों की सूची सौंपनी होगी. कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से कहा कि वे भाजपा और कांग्रेस-जेडीएस के समर्थकों की वह लिस्ट कोर्ट में जमा करवाएं, जो उन्होंने राज्यपाल को सौंपी हैं. अब येदियुरप्पा कौन सी लिस्ट पेश करेंगे और कांग्रेस-जेडी(एस) कौन सा, यह देखना दिलचस्प होगा.

शिवसेना नाराज, कहा- देश में लोकतंत्र बचा ही नहीं…
कर्नाटक मामले पर नाराज शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि येदियुरप्पा भले ही शपथ ले लिए हों, लेकिन बहुमत साबित करना मुश्किल है. उन्होंने कहा कि राज्यपाल को उसे सरकार बनाने के लिए बुलाना चाहिए, जिसके पास सबसे ज्यादा विधायकों की संख्या हो. संजय राउत ने कर्नाटक में उठे सियासी घमासान पर कहा कि लोग कहते हैं कि लोकतंत्र की हत्या हो गई, लेकिन जब देश में लोकतंत्र बचा ही नहीं तो हत्या क्या होगी.

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