विश्वनाथ मंदिर की प्रतिकृति को तीन मंजिली इमारत में चुन, शिखर पर बना दिया था टॉयलेट

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श्री काशीनाथ विश्वनाथ मंदिर
श्री काशीनाथ विश्वनाथ मंदिर के प्रतिकृति वाले इस समुद्रगुप्त कालीन मंदिर को तीन मंजिले इमारत में चुन दिया गया था और शिखर पर टॉयलेट बना दिया गया था.

श्री काशीनाथ विश्वनाथ मंदिर

मंदिर के पहुंच मार्ग और गंगा नदी के मणिकर्णिका घाट मार्ग को प्रशस्त करने के दूसरे चरण का काम शुरू

सुमन मिश्रा,
वाराणसी
: सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पहुंच मार्ग और गंगा नदी के मणिकर्णिका घाट मार्ग को प्रशस्त करने के दूसरे चरण का काम शुरू हो चुका है. इसके साथ ही यहां एक से बढ़ कर एक प्राचीन और दुर्लभ मंदिर सामने आ रहे हैं.

अधिगृहीत भवनों, रिहायशी घरों को ध्वस्त करने का काम जोरों पर
इस मार्ग पर अवरोध बने अधिगृहीत भवनों और रिहायशी घरों को ध्वस्त करने का काम जोर-शोर से चल रहा है. इसी वर्ष अप्रैल में शुरू किए गए इस कार्य का पहला चरण पूरा हो चुका है. दूसरे चरण का काम इसी नवंबर महीने से शुरू कर दिया गया है.
श्री काशीनाथ विश्वनाथ मंदिर
43 छोटे-बड़े प्राचीन मंदिर और देवालयों को मुक्त कराया
ध्वस्तीकरण के साथ ही इन भवनों और घरों के मलबों से अब तक 43 छोटे-बड़े प्राचीन मंदिर और देवालयों को मुक्त कराया जा चुका है. मंदिर प्रशासन के अनुसार अभी ऐसे और महत्व के मंदिर और विग्रह (वास्तु) मिलने की संभावना है.
श्री काशीनाथ विश्वनाथ मंदिर
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की एक प्रतिकृति का बरामद
ध्वस्तीकरण के दौरान आकार-प्रकार में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की एक प्रतिकृति का बरामद होना फिलहाल यहां चर्चा का विषय बना हुआ है. काशी विश्वनाथ मंदिर से मर्णिकर्णिका घाट तक बन रहे कॉरिडोर क्षेत्र में मकान नंबर सीके 34बाई27 में यह मंदिर मिला है. इसकी पूरी प्रतिकृति तो विश्वनाथ मंदिर की है, लेकिन शिव लिंग और नंदी का आकार बड़ा है.
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शिखर पर टॉयलेट बना रखा था
जिसके कब्जे में यह पुरातात्विक महत्व का मंदिर था, उसने अत्यंत घृणित मानसिकता का परिचय दिया है. इस मंदिर को दुनिया की नजरों से छिपाने की उसने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी. उसने इस मंदिर को तीन मजिली इमारत में चुन दिया था और उसके शिखर पर टॉयलेट तक बना रखा था. यह मंदिर समुद्रगुप्त काल का बताया जाता है.

तीर्थ मार्ग की शोभा बनेंगे बरामद मंदिर
यहां मिल रहे ये मंदिर 17-18वीं शताब्दी के माने जा रहे हैं. भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (एएसआई) की देखरेख में हालांकि इन मंदिरों और वास्तुओं का संरक्षण किया जा रहा है, इनकी सुरक्षा की व्यवस्था लचर होने से इन्हें नुकसान भी पहुंचाने कोशिशें होने के समाचार हैं. एएसआई इन्हें श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के तीर्थ मार्ग की शोभा बनाने की तैयारी भी कर रहा है.

संग्रहालय बनेगा, जीर्णोद्धार भी होगा
एएसआई के स्थानीय प्रभारी अधिकारी नीरज सिन्हा ने बताया कि हमारी टीम इन प्राचीन वस्तुओं के पुरातात्विक महत्व के साथ उनका विवरण के साथ ही उनके संरक्षण की योजना भी तैयार कर रही है. उन्होंने कहाकि इनका संग्रहालय बनाया जाएगा साथ ही मंदिरों का जीर्णोद्धार भी किया जाएगा.

रथ पर बना मंदिर मिला
इसके साथ ही मणिकर्णिका घाट के किनारे दक्षिण भारतीय शैली में रथ पर बना एक मंदिर मिला है, जिसमें समुद्र मंथन से लेकर कई पौराणिक गाथाएं उकेरी गई हैं. अब जांच के बाद ही पता चलेगा कि यह मंदिर कितना पुराना है. हालांकि उसकी वास्तुकला को देखने से ऐसा लग रहा है कि यह भी मंदिर के आस पास ही निर्माण हुआ होगा.

तीन हजार लोग कर रहे हैं काम
मंदिर कॉरिडोर के लिए अब तक खरीदे गए 296 में से 175 निजी भवनों, घरों और व्यावसायिक भवनों के ध्वस्तीकरण के लिए करीब तीन हजार मजदूर, सुपरवाइजर और इंजीनियर लगाए गए हैं. ये रात में 11 बजे से सुबह 3 बजे तक कार्य कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश में भाजपा की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस परियोजना के लिए पिछले वर्ष दिसंबर में 600 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं.

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