रत्नागिरि से रिफाइनरी को विदर्भ के भंडारा ले आएं : ‘वेद’ ने दी सीएम को सलाह

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शिवसेना द्वारा किए जा रहे विरोध का विदर्भ को हो सकता है फायदा

मुंबई : रत्नागिरि के नाणार स्थित प्रस्तावित रिफाइनरी का शिवसेना द्वारा विरोध का फायदा विदर्भ को होने की गुंजाइश बनती दिखाए दे रही है. नागपुर स्थित युवा उद्यमियों की संस्था विदर्भ इकोनॉमिक डेवलप्मेंट (वेद) काउंसिल ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि यह रिफाइनरी विदर्भ के भंडारा जिले में स्थापित की जाए.

वेद की इस पहल का सकारात्मक परिणाम सामने आने की संभावना से यहां सम्बंधित शासकीय अधिकारियों ने इंकार नहीं किया है. उद्योग विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘विदर्भ आपला’ संवाददाता से कहा कि कहा कि फिलहाल ऐसा कोई सुझाव प्राप्त होने की जानकारी विभाग को नहीं है, लेकिन यह एक अच्छा प्रस्ताव हो सकता है.

रत्नागिरि में रिफाइनरी लगाने का शिवसेना का विरोध

उल्लेखनीय है कि रत्नागिरि में तीन भारतीय पेट्रोलियम कंपनी- इंडियन आइल कार्पोरेशन, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम द्वारा स्थापित की जाने वाली प्रस्तावित रिफाइनरी का आज से मुंबई शुरू हो रहे “मैग्नेटिक महाराष्ट्र कन्वर्जेंस ग्लोबल इन्वेस्टर्स सम्मिट” के दौरान ही सामंजस्य करार होने वाला था, लेकिन स्वयं शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे इसके विरोध में उतर आए और पिछले गुरुवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात कर ऐसा कोई करार न करने को बाध्य कर दिया. इसके बाद ही शनिवार को यह घोषणा महाराष्ट्र सरकार को करनी पड़ी कि रत्नागिरि के प्रस्तावित रिफाइनरी का सामंजस्य करार नहीं होगा.

‘वेद’ ने सीएम को बताया भंडारा में रिफाइनरी होने के फायदे

वेद के उपाध्यक्ष प्रदीप माहेश्वरी ने बताया कि वेद की ओर से कल शनिवार को ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस को ई-मेल भेज कर बताया गया है कि इस प्रस्तावित रिफाइनरी की स्थापना यदि विदर्भ के भंडारा जिले में किया जाए तो इससे विदर्भ समेत मध्य भारत में भी आर्थिक विकास को तीव्र गति मिलेगी. साथ ही मध्य भारत में ईंधन सप्लाई में 15 से 20 हजार करोड़ रुपए प्रतिवर्ष की बचत भी होगी. ‘वेद’ ने मुंबई पोर्ट से भंडारा तक क्रूड आइल भेजने के लिए नागपुर-मुंबई समृद्धि मार्ग के पास से ही पाइप लाइन बिछाने की सलाह दी है.

ईंधन परिवहन व्यय में भारी कमी होगी

वेद के अनुसार फिलहाल अकेले विदर्भ में ही प्रति वर्ष 120 लाख टन पेट्रोलियम ईंधन की खपत हो रही है. वर्तमान में इसका परिवहन व्यय 4 रुपए प्रति लीटर है. पाइपलाइन से यह खर्च मात्र 30 पैसे प्रति लीटर होगा. इससे विदर्भ में कम दर पर पेटोल-डीजल मिलना संभव हुआ तो मिहान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) सहित विदर्भ के अन्य जिलों में भी उद्योग स्थापित हो सकेंगे, जिससे यहां रोजगार भी बढ़ेंगे.

विमान परिचालन के लिए भी सस्ता ईंधन मिलेगा

वेद ने बताया है कि इस रिफाइनरी का लाभ विदर्भ सहित मध्य प्रदेश और छतीसगढ़ सहित तेलंगाना को भी हो सकेगा. इससे विदर्भ साहित इन राज्यों से ‘उड़ान’ की कम दूरी के विमान परिचालन के लिए भी ईंधन (एटीएफ) सस्ते दर पर उपलब्ध हो सकेगा.

करीब दो दशक बाद महाराष्ट्र में निवेश आकर्षित करने के लिए महाराष्ट्र शासन द्वारा आज से शुरू हुए “मैग्नेटिक महाराष्ट्र कन्वर्जेंस ग्लोबल इन्वेस्टर्स सम्मिट” का लक्ष्य इसके माध्यम से राज्य को समृद्धि मार्ग पर तेज गति से आगे बढ़ाने का है.

पलीता लगाने को सामने आई शिवसेना

लेकिन एक बार फिर शिवसेना ने इसमें व्यवधान डालने का प्रयास किया है. पहली बार 1995 में भाजपा-शिवसेना शासन के दौरान इसी प्रकार का प्रयास ‘एडवांटेज महाराष्ट्र’ के तहत किया गया था. इसके बाद यूपीए शासन में ऐसी कोई पहल नहीं हुई. इसके बावजूद 2008 में राज ठाकरे के मनसे के उत्पात के कारण अनेक उद्योगपतियों ने महाराष्ट्र से गुजरात की ओर रुख करने में अपनी भलाई समझी.

अब 2018 के इस दौर में एक बार फिर सरकार के प्रयासों को शिवसेना ने रत्नागिरि की प्रस्तावित रिफाइनरी और कोंकण के जैतापुर में फ्रांस के सहयोग से लगाने वाले परमाणु बिजली घर का विरोध कर पलीता लगाने की कोशिश की है.

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