पैतृक गांव में ही छुपा था शरजील इमाम, हुआ गिरफ्तार

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शरजील इमाम

सीमा सिन्हा,
पटना :
अलीगढ़ सहित कई स्थानों पर भड़काऊ भाषण देकर देशद्रोह के लिए उकसाने के आरोप में शरजील इमाम को जहानाबाद जिले के उसके पैतृक गांव काको से गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी पुलिस ने उसके भाई से पूछताछ में मिली लीड पर करने सफलता पाई. शरजली इमाम पर पुलिस ने देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया था. वह शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन सूत्रधार भी है.
शरजील इमाम
बिहार पुलिस ने शरजील इमाम के तीन रिश्तेदारों को भी गिरफ्तार किया था, जिन्हें बाद में निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया. पुलिस ने पत्रकारों को बताया कि उसके गांव काको में ही छुपे होने की जानकारी उसके इन रिश्तेदारों से पूछताछ के दौरान मिली. 

शरजील इमाम को लेकर कई विवादित वीडियो वायरल हैं. जो वीडियो सबसे ज्यादा वायरल है उसमें वो पूर्वोत्तर के राज्यों, खासकर असम को शेष भारत से अलग (कम से कम एक महीने के लिए) करने की बात कर रहा है. इस विवादित भाषण के बाद से ही शरजील इमाम फरार चल रहा था. उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार अलग-अलग राज्यों में छापेमारी अभियान चला रही थी.

शरजील इमाम के खिलाफ कई केस दर्ज
इमाम के खिलाफ दिल्ली पुलिस द्वारा रविवार को भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए, 153 ए और 505 के तहत मामला दर्ज किया गया था. इसके अलावा उसके खिलाफ 16 जनवरी को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में दिए गए एक भाषण को लेकर शनिवार को देशद्रोह का मामला दर्ज किया. असम पुलिस ने भी शरजील के भाषणों को लेकर उसके खिलाफ आतंकवाद रोधी कानून यूएपीए के तहत एक मामला दर्ज किया.

कौन है शरजील इमाम?
शरजील इमाम ने आईआईटी मुंबई से पढ़ाई की है और इस वक्त दिली के जेएनयू में पीएच.डी. कर रहा है. वह बिहार के जहानाबाद जिले के काको थाना क्षेत्र का रहने वाला है. माना जाता है कि सीएए के खिलाफ शाहीन बाग के आंदोलन को शुरुआती दिनों में मजबूत दिशा देने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. 

शरजील के दादा हसन इमाम लोकप्रिय व्यक्ति थे. वे वर्ष 1978 में हुए पंचायत चुनाव में सरपंच पद पर चुने गए थे. घर के राजनीतिक माहौल ने उसके पिता अकबर इमाम को राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया. अकबर इमाम ने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से की. बाद में वे जदयू में शामिल हो गए. पूर्व सांसद डॉ. अरुण कुमार से उनकी काफी निकटता रही.

वर्ष 2005 के अक्टूबर में हुए चुनाव में अकबर इमाम को जहानाबाद विधानसभा से जदयू का टिकट मिला. लेकिन, वे राजद से महज चार हजार वोटों के अंतर से चुनाव हार गए. नवम्बर 2014 में कैंसर से उनका निधन हो गया. बताया गया है कि इसी दौरान शरजील कट्टरपंथ के प्रभाव में आ गया और अच्छी खासी नौकरी छोड़ दी. शरजील का छोटा भाई मुजम्मिल इमाम भी राजनीति में सक्रिय है. पहले वह जदयू का जिला प्रवक्ता था, लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान वह रासपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अरुण कुमार का सहयोगी बन गया था.

जो राष्ट्रहित में न हो वैसा कोई भी काम न करें : नीतीश कुमार
शरजील इमाम की गिरफ्तारी पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जो राष्ट्रहित में न हो, वैसा कोई भी काम किसी को नहीं करना चाहिए. सीएम नीतीश ने कहा, “किसी को भी ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए, जो राष्ट्र के हित में न हो. आरोप और गिरफ्तारी मामले पर फैसला , अदालत करेगी.”  

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