करोड़ों का सिंचाई घोटाला : अजित पवार की मुश्किलें बढ़ीं

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नागपुर : राज्य के करोड़ों रुपए के सिंचाई घोटाले के आरोपी पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस (एनसीपी) के नेता अजित पवार की अड़चनें और अधिक बढ़ गई हैं. राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की आदेश पर घोटाले की विस्तृत जांच करने और मामले को अदालत में शीघ्र पेश करने के लिए भ्रष्टाचार प्रतिबंधक ब्यूरो के नागपुर और अमरावती परिक्षेत्र के लिए अलग-अलग विशेष जांच दलों (एसआईटी) का गठन करने का निर्णय लिया है.

सरकार के इस निर्णय से अजित पवार, बाजोरिया कन्स्ट्रक्शन कंपनी के संचालक पूर्व विधायक संदीप बाजोरिया सहित अन्य आरोपियों को जबरदस्त झटका पहुंचा है. नागपुर और अमरावती के अलग-अलग मामलों के लिए दोनों परिक्षेत्र के पुलिस अधीक्षक (एसीबी) एसआईटी के प्रमुख होंगे. उनका सहयोग तीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक करेंगे और प्रत्येक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों के नेतृत्व में तीन पुलिस उपअधीक्षक, आठ पुलिस निरीक्षक और अन्य आवश्यक पुलिस कर्मचारियों का दल सहयोग करेगा.

मुख्य सचिव ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र पेश कर जानकारी दी
राज्य के मुख्य सचिव सुमित मलिक ने मुंबई उच्च न्यायालय के नागपुर खंडपीठ में शपथ पत्र प्रस्तुत कर सरकार के इस फैसले की जानकारी दी है. सिंचाई घोटाले की जांच अदालत द्वारा निर्धारित कालावधि में पूर्ण करने की जिम्मेदारी राज्य शासन की है. इसके लिए न्यायालय ने पिछले 14 मार्च को सरकार को देते हुए आगे की जांच की तैयारी की जानकारी देने का आदेश दिया था.

अन्य मुद्दों पर 18 अप्रैल को सुनवाई
न्यायालय ने बुधवार को सरकार का शपथ पत्र रेकॉर्ड पर लेकर अन्य मुद्दों पर 18 अप्रैल को सुनवाई की तिथि निश्चित कर दी है. इस मामले में न्यायालय में जनहित याचिका प्रलंबित है. याचिकाकर्ता की ओर से अधि.श्रीधर पुरोहित और अधि.फिरदोस मिर्जा, अजित पवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रसाद ढाकेफालकर, बाजोरिया कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुबोध धर्माधिकारी और सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद जायस्वाल और अधि.सुमंत देवपुजारी पैरवी कर रहे हैं.

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