संघ के शस्त्र पूजन को भारिप बहुजन महासंघ ने की गैरकानूनी करार देने और रोक लगाने की मांग

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संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत गत वर्ष 2017 के विजयादशमी पर नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में शस्त्र-पूजन करते हुए. (फाइल फोटो).

संघ ने कहा- वह इस वर्ष भी अपनी परंपरा निभाएगा

विपेन्द्र कुमार सिंह,
नागपुर :
विजयादशमी अथवा दशहरा पर देश में शस्त्र पूजन की परंपरा पुरातन है. इसी परम्परा के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) भी दशहरे के अवसर पर शस्त्र पूजन करता रहा है. लेकिन इस वर्ष भारिप बहुजन महासंघ के नेता डॉ. प्रकाश आंबेडकर के साथ अन्य लोगों ने सार्वजनिक तौर पर संघ के शस्त्र पूजन को गैरकानूनी करार देते हुए इस परंपरा पर रोक लगाने की मांग कर विवाद खड़ा करने की कोशिश की है. संघ सूत्रों अनुसार इसके बावजूद संघ इस वर्ष भी अपनी परंपरा को निभाएगा.

गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी (वर्तमान प्रधानमंत्री) 2013 के विजयादशमी के अवसर पर शस्त्र-पूजन करते हुए. (फाइल फोटो).

आरएसएस के विदर्भ प्रांत के प्रचार प्रमुख अनिल सांबरे ने कहा कि इस वर्ष भी संघ प्रमुख द्वारा दशहरा के अवसर पर शस्त्र पूजन का कार्यक्रम होगा. सांबरे के अनुसार इस वर्ष संघ की निमंत्रण पत्रिका में शस्त्र पूजन का जिक्र नहीं किया गया है. इससे लोगों के मन में यह शंका पैदा हुई कि इस वर्ष यह कार्यक्रम नहीं होगा. लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है. उन्होंने कहा कि संघ की इस परंपरा पर विवाद खड़ा करने वाले अपनी कुंठित मानसिकता का परिचय दे रहे हैं. यह परंपरा लंबे समय से देश में चल रही है.

बाल स्वयंसेवकों के कार्यक्रम में संपन्न हुआ शस्त्र पूजन
इसी रविवार को नागपुर में कई जगहों पर बाल स्वयंसेवकों का विजयादशमी उत्सव संपन्न हुआ. इस कार्यक्रम में परंपरा का निर्वाह करते हुए अतिथियों ने शस्त्र पूजन की विधि संपन्न की.

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