विदर्भ से ही विधान परिषद चुनाव में मिलीं दोनों सीटें भाजपा को

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अमरावती में मिली ऐतिहासिक जीत, वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरोली पर अपेक्षित सफलता नहीं

रवि लाखे, अश्विन शाह/हेमंत
वर्धा/अमरावती :
स्थानीय स्वशाषी निकाय क्षेत्र के चुनावों में आज विदर्भ की दोनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों ने जीत हासिल कर ली. अमरावती में जहां भाजपा के प्रवीण पोटे ने जहां 458 प्राप्त कर अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के अनिल माधौगढ़िया को घुटनों पर आने को मजबूर कर दिया, उन्हें मात्र 17 मत प्राप्त हो सके.

88 मतों का ही अंतर रहा वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरोली की सीट पर
वहीं वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरोली की सीट भाजपा मात्र 88 वोटों के अंतर से बचा पाई. यहां भाजपा के डॉ. रामदास आंबटकर को 550 मत प्राप्त हुए, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार इंद्रकुमार सराफ ने 462 मत प्राप्त कर लिए. मात्र 88 मतों का ही अंतर रहा. भाजपा यहां से 210 मतों के अंतर से विजयी होने का दावा कर रही थी.

राज्य की दोनों सीटें भाजपा को विदर्भ से ही
राज्य की सभी 5 विधान परिषद चुनावों के परिणाम आ गए है. इन चुनावों में भाजपा 2, शिवसेना 2 और एनसीपी को 1 स्थान पर सफलता मिली है. भाजपा को दोनों स्थान विदर्भ से ही प्राप्त हुए हैं. जबकि शिवसेना ने नासिक और परभणी-हिंगोली सीटों पर कब्जा किया है. वहीं एकमात्र कोंकण सीट एनसीपी की झोली में गई है.

मुश्किल से ही सीट कांग्रेस से बचा सकी भाजपा
वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरोली की सीट पर भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई. एक तरह से मुश्किल से ही यह सीट वह कांग्रेस से बचा सकी है. जैसा की “विदर्भ आपला” ने अपने सर्वेक्षण में भी यह जता दिया था कि भाजपा के लिए वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरोली की यह सीट कठिन होती जा रही है. वर्धा जिले में कांग्रेस की स्थिति पूर्व मंत्री रणजीत कांबले और महिला कांग्रेस नेतृ चारूलता टोकस के निर्देशन में सराफ का जोरदार प्रचार चल रहा था. वहीं गढ़चिरोली में भी कांग्रेस नेता सीमित साधनों के बावजूद सक्रिय रहे.

चंद्रपुर के कांग्रेसी हैवीवेट ने सराफ को दी मात्र अपनी सहानुभूति
भाजपा के मुकाबले एक तो कांग्रेस ने वैसे भी इंद्रकुमार सराफ के रूप में काफी असरदार उम्मीदवार उतार दिया था. दूसरे यदि चंद्रपुर जिले से सराफ को पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की थोड़ी भी मदद मिल जाती तो भाजपा के लिए यह सीट बचाना संभव ही नहीं हो पाता. कांग्रेस के हैवीवेट नेता नरेश पुगलिया और अन्य नेताओं ने मात्र सराफ को सहानुभूति देना ही काफी समझा. बताया जाता है कि उन्होंने अपनी ओर से जिला परिषद, नगर पार्षदों अथवा अन्य निकायों के मतदाताओं को अपनी ओर से थोड़ा भी प्रोत्साहित कर सराफ के पक्ष में वोट डालने को कहते तो सराफ के लिए जीत का मार्ग प्रशस्त हो जाता.

“विदर्भ आपला” के सर्वेक्षण की चर्चा
पूर्व मंत्री और विधायक रणजीत कांबले और प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष चारूलता टोकस सहित अनेक नेताओं ने “विदर्भ आपला” की शोधपूर्ण सर्वेक्षण रिपोर्ट की तारीफ़ की है. कांग्रेस नेताओं ने माना कि “विदर्भ आपला” की रिपोर्ट से भी क्षेत्र के कांग्रेस नेताओं को अहसास हुआ कि वे भाजपा को टक्कर दे सकते हैं. कुछ भाजपा नेताओं भी अपना नाम जाहिर नहीं करने की शर्त के साथ माना कि “विदर्भ आपला” की सर्वेक्षण रिपोर्ट की हमारे नेताओं उपेक्षा की. उन्होंने कहा कि हम मान कर चल रहे थे कि हम बिलकुल आसानी से जीत जाएंगे. लेकिन हमें कांग्रेस कड़ी टक्कर मिली.

अपेक्षित अपरिणाम हासिल नहीं कर पाई भाजपा
धन बल और सभी साधन सुविधाओं से संपन्न भारतीय जनता पार्टी के लिए वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरोली सीट को मात्र 88 मतों के अंतर जीतना आश्चर्य की बात सकती है, क्योंकि इन सब के अलावा उन्हें अपने दो बड़े नेता मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी के अलावा वर्धा जिले के पालक मंत्री एवं चंद्रपुर जिले के निवासी सुधीर मुनगंटीवार के साथ ही विधायकों और संसद का सहयोग भी प्राप्त था.

डैमेज कंट्रोल में सफल रहे मुनगंटीवार
इसमें कोई शक नहीं कि विगत 14 मई को नागपुर में केंद्रीय मंत्री गड़करी से खरी-खरी सुन अनेक भन्नाए कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को मना कर मुनगंटीवार और उनकी टीम ने डैमेज कंट्रोल करने सफलता हासिल कर ली थी. लेकिन कांग्रेस के कम से कम वर्धा जिले के प्रचार तंत्र को भेदने में उन्हें सफलता नहीं मिल पाई. उसी तरह विधायक कांबले की तरह ही अन्य कांग्रेसी नेताओं ने मेहनत होती तो परिणाम बदल गया होता.

इंद्रकुमार सराफ की सक्रियता लाजवाब
इसके अलावा कांग्रेस प्रत्याशी इंद्रकुमार सराफ को भी उम्र की वर्तमान दहलीज भी लोगों ने जूझते और मेहनत करते देखा. आग बरसाती धूप में सराफ की सक्रियता कम नहीं हुई थी. उनका साथ एनसीपी और रिपब्लिकन पक्ष भरपूर दिया. शिवसेना के एक बड़े वर्ग द्वारा भी उनका साथ देने की खबर है. इसका कारण यह भी रहा की उमके पुत्र ही वर्धा शिवसेना प्रमुख हैं.

अमरावती में प्रवीण पोटे की ऐतिहासिक रही जीत
राजयमंत्री प्रवीण पोटे को भाजपा ने दूसरी बार स्थानीय स्वशाषी निकाय क्षेत्र का अमरावती से उम्मीदवार बनाया था. जिले के पालक मंत्री के रूप में पोटे के उल्लेखनीय कार्य और स्थानीय स्वशाषी निकायों पर उनकी पकड़ का ही परिणाम कि कांग्रेस जैसी पार्टी भी उनके मुकाबले का कोई उम्मीदवार नहीं मिला. पार्षद अनिल माधोगढ़िया को अपना उम्मीदवार बना कर 17 से अधिक वोट नहीं जुटा सकी. जबकि कांग्रेस के मतदाता नगरसेवक और नगर सेविका की कुल संख्या 136 मित्र दलों के मतदाओं की संख्या 24 से कहीं अधिक थी. अमरावती में पोटे ने अपनी जीत अपने बूते पर ही हासिल कर इतिहास ही रच दिया. हालांकि वहां तीन मत नोटा के खाते में गए और दस मत खराब हुए. अर्थात दस मतदाताओं ने मतपत्रों पर गलत ढंग से मुहर लगाए.

राज्य के विधान परिषद चुनाव केपरिणाम

1. नासिक स्थानीय स्वराज संस्था
शिवसेना – नरेंद्र दराडे (412 मत)
एनसीपी – शिवाजी सहाणे (219 मत)
शिवसेना 193 मतों से विजयी

2. कोंकण स्थानीय स्वराज संस्था
एनसीपी – अनिकेत तटकरे (421 मत)
शिवसेना – राजीव साबले (221 मत)
एनसीपी 200 मतों से विजयी

3. परभणी-हिंगोली स्थानीय स्वराज संस्था
शिवसेना – विप्लव बाजोरिया (256 मत)
कांग्रेस – सुरेश देशमुख (221 मत)
शिवसेना 35 मतों से विजयी

4. अमरावती स्थानीय स्वराज संस्था
भाजपा – प्रवीण पोटे-पाटील (458 मत)
कांग्रेस – अनिल माधोगढ़िया (17 मत)
भाजपा 441 मतों से विजयी

5. वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरोली स्थानीय स्वराज संस्था
भाजपा – रामदास आंबटकर (550 मत)
कांग्रेस – इंद्रकुमार सराफ (462 मत)
भाजपा 88 मतों से विजयी

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