पटना में जल-प्लावन : कोल इंडिया सामने आई, पानी निकालने में जुटी

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पटना
पटना के सैदपुर इलाके में पानी निकालने में जुटे कोल इंडिया के शक्तिशाली पम्प. 

सीमा सिन्हा, 
पटना :
बिहार की राजधानी पटना में बाढ़ और जल-प्लावन के कारण जन-जीवन संकट में है. राजधानी के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने भी हाथ बटाया है. सीआईएल शहर में जल-प्लावन से निपटने के लिए चार बड़े,शक्तिशाली पम्प्स उपलब्ध करवाए हैं. राजेंद्रनगर, सैदपुर तथा पाटलिपुत्र कॉलोनी के निचले रिहायशी इलाकों में भरे पानी को निकालने में ये पम्प रात-दिन लगे हैं.

प्रति मिनट 5000 गैलन पानी की निकासी- क्षमता के दो तथा 1000 गैलन पानी की पम्पिंग-क्षमता के दो पम्प यानि चार पम्प्स वहां लगातार पानी निकालने के कार्य में लगे हैं, जिससे बाढ़ प्रभावित बिहार की राजधानी पटना में राहत-कार्य में सहूलियत हो सके इनमें से दो पंप एक हजार गैलन प्रति मिनट और दो पंप पांच-पांच हजार गैलन प्रति मिनट की क्षमता से पानी को निकालने में सक्षम हैं. पिछले हफ्ते पटना समेत बिहार के कई शहरों को मात्र 2 दिनों में वहां होने वाली औसतन सालाना बारिश की 40 प्रतिशत बारिश का सामना करना पड़ा, जिससे वहां भीषण बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई.

पटना
पुनपुन नदी की बाढ़ से जल-प्लावित पटना का इलाका. 

पुनपुन ने फिर बढ़ाई मुसीबत, ट्रेन परिचालन रुका
पटना में जलजमाव कायम है. पुनपुन नदी में आई बाढ़ ने पटनावासियों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं. पुनपुन नदी पर बने रेल पुल के गार्डर पर पानी चढ़ने से पटना-गया रेल रूट पर ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया है. इससे पटना से गया के बीच रेल संपर्क टूट गया है. इसके अलावा बख्तियारपुर-राजगीर रूट पर भी बेना के पास ट्रैक पर पानी चढ़ने से ट्रेनों का परिचालन अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है. ट्रैक के निरीक्षण के बाद रेलवे ने गुरुवार शाम से पैसेंजर और एक्सप्रेस सभी तरह की ट्रेनों का परिचालन बंद करने का निर्णय लिया है.

रेल यात्रियों को हो रही परेशानी
इस कारण पटना से जहानाबाद, गया होकर रांची, धनबाद, बनारस जाने वाले रेल यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. वहीं, बख्तियारपुर से राजगीर आने-जाने वाले को सड़क मार्ग से जाना पड़ा. दानापुर रेल मंडल के पीआरओ संजय कुमार प्रसाद ने बताया कि ट्रैक से पानी उतरने के बाद ही इन दोनों रूटों पर ट्रेन सेवा शुरू होगी. गुरुवार शाम छह बजे पुनपुन का जलस्तर 53.60 मीटर हो गया था. वर्ष 1976 के बाद नदी का जलस्तर इतना ऊपर गया है. तब जलस्तर 53.91 मीटर हो गया था, जो अब तक रिकॉर्ड है.

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पुनपुन नदी की बाढ़ से जल-प्लावित पटना की गालियां. 

1976 में पटना में मचाई थी तबाही
वर्ष 1976 में पुनपुन से आई बाढ़ ने पटना में तबाही मचाई थी. इस बार भी बाढ़ का पानी इंजीनियरिंग बांध के ऊपर से बहकर पटना सुरक्षा बांध तक पहुंच गया है. इससे दर्जनों गांव जलमग्न हो गए हैं. जिन गांवों में पानी घुसा है, वहां के लोग बांध, नेशनल हाईवे और अन्य ऊंची जगहों पर रह रहे हैं. लोगों ने जान-माल की हिफाजत के लिए अन्य कई ऊंचे स्थानों पर शरण ले रखी है.

सुरक्षा बांध पर कोई खतरा नहीं
हालांकि प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा बांध पर कोई खतरा नहीं है. स्थिति को देखते हुए डीएम कुमार रवि और एसएसपी गरिमा मलिक ने इंजीनियरिंग बांध और पटना सुरक्षा बांध का जायजा लिया. जल संसाधन विभाग के इंजीनियरिंग बांध पर कैंप कर रहे हैं. पालीगंज, धनरुआ, पुनपुन में नाव के साथ एनडीआरएफ की टीम तैनात कर दी गई है.

 

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