पेंशनर्स को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से वंचित करने में जुटा EPFO 

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परिपत्र जारी कर सितंबर 2014 से पूर्व रिटायर हुए वयोवृद्धों के साथ दिखाई क्रूरता

*कल्याण कुमार सिन्हा-
नागपुर : भारत की सर्वोच्च अदालत (सुको) के एक बड़े बेंच ने एक रिव्यू पिटीशन पर पिछले 4 नवंबर 2022 घुमा फिरा जो फैसला दिया है, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) एक बार फिर उसका फायदा उठाते हुए, EPS 95 के तहत रिटायर्ड वयोवृद्ध पेंशनर्स (Pensioners) को उच्च पेंशन के लाभ से वंचित करने में जुट गया है.

दो दिन पूर्व ही 29 दिसंबर 2022 को जारी एक परिपत्र में उसने अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देशित किया है कि 1.9.2014 से पहले सेवानिवृत्त (58 वर्ष) कर्मचारी, जिन्होंने उच्च वेतन पर पेंशन अंशदान के लिए कोई विकल्प नहीं चुना और सदस्यता से बाहर हो गए, उन्हें निर्णय के अनुसार कोई लाभ नहीं दिया जाए. इसके साथ ही इस परिपत्र में 2014 से पहले सेवानिवृत्त जिन कर्मचारियों द्वारा विकल्प दिया गया था, लेकिन EPFO ने अस्वीकार कर दिया गया, उसका प्रमाण प्रस्तुत करने पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया गया है.

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कर्मचारी पेंशन (1995) समन्वय समिति के विधि सलाहकार दादा तुकाराम झोड़े.

कर्मचारी पेंशन (1995) समन्वय समिति के विधि सलाहकार दादा तुकाराम झोड़े ने इस परिपत्र को केंद्र सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुमोदन के प्रतिकूल बताते हुए इसे EPFO से वापस लेने की मांग की है. उन्होंने इस परिपत्र को बहुत ही गलत, अस्पष्ट, अपूर्ण और विरोधाभासी करार दिया है.

उल्लेखनीय है कि EPS 95 के पैरा 26.6 के तहत विकल्प पर आरसी गुप्ता मामले का फैसला 1.9.2014 से पहले सेवानिवृत्त होने वाले पेंशनर्स के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस फैसले में एक वैध विकल्प माना है. लेकिन EPFO का यह परिपत्र इस मामले में मौन है. जबकि 2016 के आरसी गुप्ता मामले पर सुप्रीम कोर्ट के 23.03.2017 के फैसले का केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदन करने के साथ ही EPFO ने भी इसे स्वीकार कर लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने अपने ताजा फैसले के पैरा 44(ix) में आरसी गुप्ता केस से संबंधित पेंशनर्स के मामले को आठ सप्ताह के भीतर लागू करने का भी आदेश दे चुका है.

दादा झोड़े ने EPFO का ध्यान सुप्रीम कोर्ट के 04.11.2022 के फैसले की ओर दिलाते हुए बताया है कि कोर्ट ने अपने फैसले में न तो आरसी गुप्ता अथवा ऑस्टिन जोसेफ केस में किसी प्रकार का बदलाव सुधार अथवा उसे पलटने जैसी कोइ बात नहीं की है. ऐसे में EPFO प्राधिकारी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को अपनी मर्जी और इच्छा के अनुसार संशोधित नहीं कर सकते.

झोड़े ने EPFO के 29.12.2022 को जारी परिपत्र को सुप्रीम कोर्ट के 04.11.2022 के आदेश के पैरा (ix) के अनुपालन में बहुत ही गलत, अस्पष्ट, अपूर्ण और विरोधाभासी बताया है. उन्होंने EPFO से अपने इस परिपत्र को वापस लेने और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने की सलाह दी है. उन्होंने 1.9.2014 से पहले सेवानिवृत्त (58 वर्ष) पेंशनर्स के लिए उच्च पेंशन निर्धारित करने के न्यायोचित दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है.

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