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फसलों के लिए मुफ्त के सुरक्षा कवच : नीम के साथ अपनाएं ‘करंज’

General कृषि और किसान देश
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– कल्याण कुमार सिन्हा
देश में विदर्भ आज कृषि फसलों के क्षेत्र में अपनी एक विशिष्ट पहचान रखता है. कपास, सोयाबीन और संतरों के बागों से सजी यह धरती जितनी समृद्ध है, यहाँ के किसानों की चुनौतियाँ भी उतनी ही बड़ी हैं. फसलों पर लगने वाले हानिकारक कीट और उनके कारण बाजार से खरीदे जाने वाले महंगे रासायनिक कीटनाशक किसानों की खेती की लागत को लगातार बढ़ा रहे हैं. इस बढ़ते खर्च के कारण किसानों का मुनाफा कम होता जा रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस समस्या का एक बेहद प्रभावी, प्राकृतिक और लगभग मुफ्त समाधान हमारे खेतों की मेड़ों और सड़कों के किनारे ही बिखरा पड़ा है?

हम सभी जानते हैं कि विदर्भ में नीम के पेड़ भी बहुतायत में हैं और किसान भाई वर्षों से कीट नियंत्रण के लिए नीम के तेल या पत्तों का उपयोग करते आ रहे हैं. लेकिन पिछले पाँच-छह वर्षों में हमारे क्षेत्र में एक और चमत्कारी पेड़ भारी संख्या में लगाया गया है, जो अब बड़ा और घना हो चुका है- वह है “करंज (Pongamia)”.

आज स्थिति यह है कि विदर्भ के गाँवों और रास्तों के किनारे करंज के पेड़ लदे हुए हैं. हर साल इनके बीज बड़ी मात्रा में नीचे झड़ते हैं और सही जानकारी न होने के कारण सड़कर बर्बाद हो जाते हैं. कृषि विज्ञान के दृष्टिकोण से, यह बीजों की बर्बादी नहीं, बल्कि किसानों के सोने की बर्बादी है.

# करंज : फसलों का एक छिपा हुआ ‘डॉक्टर’
वैज्ञानिक शोधों से यह सिद्ध हो चुका है कि जिस तरह नीम के भीतर कीटों से लड़ने वाला ‘एज़ाडिरैक्टिन’ होता है, ठीक उसी तरह करंज के बीजों और तेल में “करंजिन’ (Karanjin)” नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली तत्व पाया जाता है. यह तत्व फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले कीटों के जीवन चक्र को तोड़ देता है. यह दोनों प्रकृति प्रदत्त मुफ्त की दवा हैं और डॉक्टर भी. 
विदर्भ की मुख्य फसलों के लिए करंज विशेष रूप से वरदान है –

1. रस चूसने वाले कीटों पर अचूक वार
कपास और संतरे के बागों में लगने वाली सफेद मक्खी (Whitefly), थ्रिप्स (Thrips), और माइट्स (Mites) पर करंज का तेल नीम से भी ज्यादा असरदार पाया गया है.

2. फफूंद (Fungus) से सुरक्षा
करंज में प्राकृतिक कवक नाशक गुण होते हैं. यह फसलों में लगने वाले फफूंद जनित रोगों को शुरुआती चरण में ही रोक देता है.

# ‘एक और एक ग्यारह’ : नीम और करंज का जादुई फॉर्मूला
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान भाई केवल नीम या केवल करंज का उपयोग करने के बजाय दोनों को मिला दें, तो इसके परिणाम जादुई होते हैं.

विधि : आधा लीटर नीम का तेल और आधा लीटर करंज का तेल आपस में मिला लें (1:1 का अनुपात). 

उपयोग का तरीका : एक लीटर पानी में केवल 5 मिलीलीटर इस मिश्रित तेल को डालें. तेल पानी में अच्छे से घुल जाए, इसके लिए उसमें 2 बूंद लिक्विड सोप या शैम्पू मिलाकर फसलों पर छिड़काव करें. जब ये दोनों प्राकृतिक शक्तियां एक साथ मिलती हैं, तो कीटों में इसके प्रति प्रतिरोधक क्षमता (Resistance) नहीं बन पाती और फसल पूरी तरह सुरक्षित हो जाती है.

# समय की पुकार
किसान भाइयों, प्रकृति ने हमारी समस्याओं का समाधान हमारे आसपास ही दे रखा है. हमारे खेतों की मेड़ों पर खड़े नीम और करंज के पेड़ केवल छांव देने के लिए नहीं हैं, वे हमारी फसलों के सजग प्रहरी हैं. आइए, इस साल इन झड़ते हुए करंज के बीजों को बर्बाद होने से बचाएं, इन्हें इकट्ठा करें और नीम-करंज के इस अनोखे संगम से अपनी खेती की लागत को आधा करें. जब लागत घटेगी, तभी विदर्भ का किसान आगे बढ़ेगा और समृद्ध होगा.